पाकिस्तान को भारत की लताड़, करारा जवाब दिया


न्यूयॉर्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था कि हम भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांति चाहते हैं. इस पर भारत ने करारा जवाब दिया है. संयुक्त राष्ट्र में भारत मिशन के प्रथम सचिव मिजिटो विनिटो ने कहा कि यह काफी खेदजनक है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए इस मंच को चुना. साथ ही कहा कि उन्होंने अपने ही देश में कुकृत्यों को छिपाने और भारत के खिलाफ कार्रवाई को सही ठहराने के लिए ऐसा किया है.
एजेंसी के मुताबिक भारतीय राजनयिक मिजिटो विनिटो ने भारत के खिलाफ झूठे आरोप लगाने से पहले पाकिस्तान को उसके किए की याद दिलाई. विनिटो ने जोर देकर कहा कि जम्मू-कश्मीर पर दावा करने के बजाय इस्लामाबाद को “सीमा पार आतंकवाद” को रोकना चाहिए. विनिटो ने पाकिस्तान में हिंदू, सिख और ईसाई परिवारों की लड़कियों के जबरन अपहरण, शादी और “पाकिस्तान के भीतर धर्मांतरण” की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया.
भारतीय राजनयिक मिजिटो विनिटो ने कहा कि मानवाधिकारों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों और बुनियादी शालीनता की हकीकत है. उन्होंने कहा कि ऐसा देश पड़ोसियों के खिलाफ अनुचित और अस्थिर क्षेत्रीय दावे नहीं करेगा. इसे व्यापक रूप से साझा भी किया जाता है. और इसे महसूस किया जा सकता है. यह निश्चित रूप से तब होगा जब सीमा पार आतंकवाद समाप्त हो जाएगा, जब सरकारें अंतरराष्ट्रीय समुदाय और खुद के प्रति ईमानदार होंगी. जब अल्पसंख्यकों को सताया नहीं जाएगा.
शहबाज के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मिजिटो विनिटो ने कहा कि अगर कोई ये दावा करता है कि वह अपने पड़ोसियों के साथ शांति चाहता है, तो वह कभी भी सीमा पार से आतंकवाद को प्रायोजित नहीं करेगा, न ही मुंबई में हुए आतंकवादी हमले के योजनाकारों को आश्रय देगा.
दरअसल, UNGA में पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने कहा था कि भारत को रचनात्मक जुड़ाव के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए विश्वसनीय कदम उठाने चाहिए. हम पड़ोसी हैं और हमेशा के लिए रहेंगे. चुनाव हमारा है कि हम शांति से रहें या एक-दूसरे से लड़ते रहें. उन्होंने कहा कि 1947 के बाद से हमारे बीच 3 युद्ध हुए हैं और इसके परिणामस्वरूप दोनों तरफ केवल दुख, गरीबी और बेरोजगारी बढ़ी है.
शहबाज ने कहा कि शांतिपूर्ण बातचीत और चर्चा के माध्यम से अपने मतभेदों, हमारी समस्याओं और हमारे मुद्दों को हल करना अब हम पर निर्भर करता है. मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि भारत इस संदेश को समझे कि दोनों देश एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. युद्ध कोई विकल्प नहीं है, केवल शांतिपूर्ण बातचीत से ही मुद्दों का समाधान हो सकता है, ताकि आने वाले समय में दुनिया और अधिक शांतिपूर्ण हो सके.



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